Saturday, July 07, 2007

गूगल को शत शत नमन

मुझे कब से इसी दिन का इंतज़ार था .... ये लाजवाब है, हिंदे लिपी में स्वचालित अनुवाद।
अरे वाह! ये तो पूर्ण विराम भी लागाता है ...

अंततः गूगल देवता ने मेरी सुन ली, और ये अति उत्तम तरीका मुझे दिया हिंदी लिखने का। धन्य हो महाराज , आप ना होते तो हम लघु मनुष्य ना जाने कब तब इस सहजता से वंचित रहते।

गूगल देवता की जय !

2 comments:

रवि रतलामी said...

हम भी शामिल हैं -

गूगल देवता की जय!!

अब धड़ाधड़ और घुँआधार लिखिए हिन्दी में!

Prasad Narulkar said...

wow...
thats cool...
google rocks!!!